कानपुर में नोटबंदी से पहले पकड़े 9 लाख रुपए पुलिस के गले की हड्डी बने

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कानपुर। नोटबंदी के ऐन पहले प्रतियोगी परीक्षाओं के सॉल्वर गिरोह से बरामद 9 लाख रुपए पुलिस के गले की हड्डी बन गए। जमानत पर छूटे आरोपियों ने कोर्ट से रिलीज किए गए पुराने नोट लेने से इनकार कर दिया। एसीएमएम कोर्ट में अपील की तो पुलिस से जवाब मांगा गया। अब जवाब देते नहीं बन रहा है।
कल्याणपुर पुलिस ने आरबीआई के सर्कुलर का हवाला देते हुए सफाई दी कि कोषागार में रुपए जमा करने के आदेश थे लेकिन कोषागार ने जमा नहीं किया। लिहाजा रुपए मालखाने में जमा करा दिए गए थे। कोर्ट ने कहा, जीडी दिखाओ, कहां दर्ज किया कि कोषागार ने रुपए नहीं जमा किए। कोर्ट को क्यों नहीं बताया। एसटीएफ प्रभारी ने पूरी जिम्मेदारी कल्याणपुर थाना पुलिस पर थोप दी। सफाई दी कि माल मुकदमे की जिम्मेदारी कल्याणपुर पुलिस की थी, लिहाजा वही जाने। कोर्ट ने दोनों को 5 फरवरी को तलब किया है।
आरोपियों ने पुराने नोट लेने से किया इनकार
कल्याणपुर पुलिस और एसटीएफ साइबर क्राइम प्रभारी लखनऊ की टीम ने 23 अक्तूबर 2016 को प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय सॉल्वर गिरोह का पर्दाफॉश कर मार्कशीट, प्रवेश-पत्र, पैनकार्ड, आधार कार्ड और दो आरोपियों के पास से 9 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे। हाईकोर्ट से जमानत पर छूटे आरोपी रविकांत ने जब्त किए गए छह लाख और रूपेश शर्मा ने तीन लाख रुपए रिलीज करने का प्रार्थना-पत्र दिया। 30 अक्तूबर 2017 को एसीएमएम द्वितीय की कोर्ट ने नौ लाख रुपए रिलीज करने का आदेश दिया। जब रुपए लेने पहुंचे तो पुलिस ने पुराने नोट पकड़ा दिए। आरोपी रविकांत और रूपेश ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया। एसीएमएम द्वितीय कोर्ट में दोनों ने दोबारा प्रार्थना-पत्र देकर रुपए नहीं बदलने की शिकायत की। इसमें कोर्ट ने कल्याण थाने से रिपोर्ट मांगी। 6 नवंबर 2017 को कल्याणपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक ने आरबीआई के सर्कुलर का हवाला देते कहा कि मुकदमे से संबंधित मामलों में रुपए कोषागार में जमा करने के आदेश थे लेकिन कोषागार ने रुपए जमा नहीं किए। लिहाजा रुपए थाने के मालखाने में ही जमा रहे। कोर्ट ने थानाप्रभारी से पूछा कि अगर कोषागार गए थे तो जीडी दिखाओ और कोर्ट को इस बारे में सूचना क्यों नहीं दी। फिलहाल कल्याणपुर थाना प्रभारी कोई जवाब नहीं दे सके।
एसटीएफ ने कल्याणपुर पुलिस पर थोपी जिम्मेदारी
उधर, एसटीएफ साइबर क्राइम प्रभारी ने कोर्ट के नोटिस के जवाब में कहा कि वह विवेचना कर रहे थे। माल मुकदमा कल्याणपुर थाने में सुरक्षित था और उनकी कस्टडी में है। ऐसे में कोर्ट ने दोनों की रिपोर्ट को देखकर थानाध्यक्ष कल्याणपुर और एसटीएफ साइबर क्राइम प्रभारी को पांच फरवरी 2018 को तलब किया है। कोर्ट ने दोनों सुरक्षा एजेंसियों से पूछा है कि आखिरकार समय सीमा के अंदर रुपए क्यों नहीं बदले गए। समय सीमा के अंदर रुपए बदलने की जिम्मेदारी किसकी थी।

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