अदर दैन मोदी का कैंपेन फिर शुरू!

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नरेंद्र मोदी नहीं कोई और चाहिए! यह कैंपेन एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले लोकसभा चुनाव के समय भी यह अभियान चल रहा था। भाजपा के कई नेता इस उम्मीद में थे कि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं आएगा और तब शायद सहयोगी पार्टियां मोदी को प्रधानमंत्री नहीं स्वीकार करें। तब कई ऐसे नेताओं के नाम चल रहे थे, जिनको संघ और भाजपा की सहयोगी पार्टियों का समर्थन मिल सकता था। तब चुनाव नतीजों ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

अब जैसे जैसे अगला चुनाव नजदीक आ रहा है यह अभियान तेज होता जा रहा है। इस बार भी भाजपा के कई नेता इसमें शामिल हैं तो इस बार विपक्षी पार्टियां, मीडिया समूह, गैर सरकारी संगठन और कई दूसरे लोग व्यक्तिगत हैसियत से शामिल हैं। सब अपने अपने हिसाब से लोकसभा चुनाव का अनुमान लगा रहे हैं। यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि चुनाव से करीब सवा साल पहले अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का अनुमान है कि इस बार लोकसभा में भाजपा 215 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी। अनौपचारिक बातचीत में भाजपा के कई नेता मान रहे हैं कि 220 से सवा दो सौ सीटों के बीच भाजपा को मिल सकती हैं। अगर भाजपा 50 से ज्यादा सीटें हारती है तो शायद नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे। भाजपा के कुछ जानकार नेताओं का कहना है कि भाजपा को 240 या उससे ज्यादा सीट आएगी तभी मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। अगर इससे कम सीट आती है तो राजनाथ सिंह से लेकर नितिन गडकरी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज तक के नाम की चर्चा है।

दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां भी इसी तरह के हिसाब लगा रही हैं। उनका अनुमान है कि भाजपा दो सौ सीटों के आसपास रहेगी और तब उसका गठबंधन बिखरेगा। उस गठबंधन से कुछ पार्टियां निकल कर विपक्षी गठबंधन के साथ आएंगी। लेकिन ऐसा तब होगा जब विपक्ष की ओर से राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं होंगे। यानी क्षेत्रीय पार्टियां 1996 के हालात की कल्पना कर रही हैं। उनकी ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में सबसे आगे ममता बनर्जी हैं और उसके बाद नवीन पटनायक हैं। नीतीश कुमार का नाम अब भी चर्चा में है, अगर वे एलायंस तोड़ते हैं और चौथा नाम शरद पवार का है।

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