पते के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट की मान्यता हो सकती है खत्म

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नई दिल्ली। पासपोर्ट संभवत: अब पते के वैध प्रमाण के रूप में काम नहीं करेगा। दरअसल, विदेश मंत्रालय ने यात्रा दस्तोवज के आखिरी पन्ने पर पासपोर्ट धारक का पता प्रकाशित न करने का फैसला किया है। बता दें कि पासपोर्ट के आखिरी पन्ने पर धारक के कानूनी अभिभावक का नाम, पति/पत्नी का नाम और उनका पता अंकित होता है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘पासपोर्ट का आखिरी पन्ना अब प्रकाशित नहीं होगा, ईसीआर (इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड) स्थिति वाले पासपोर्ट धारकों को नारंगी रंग के पासपोर्ट जैकेट के साथ पासपोर्ट जारी किया जाएगा और गैर-ईसीआर स्थिति वाले लोगों को नीले रंग का पासपोर्ट मिलता रहेगा।’ एक 3 सदस्यीय समिति की सिफारिशें मंजूर कर फैसला किया गया है कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत जारी किए गए यात्रा दस्तावेजों का आखिरी पन्ना अब से प्रकाशित नहीं किया जाएगा।

बता दें कि इस समिति के सदस्यों में विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे। बयान के अनुसार समिति ने पासपोर्ट आवेदनों से संबंधित विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की। इनमें इस बात की समीक्षा शामिल थी कि क्या मां/बच्चे ने इस बात पर जोर दिया है कि पासपोर्ट में पिता के नाम का उल्लेख न हो? साथ ही इसमें एकल अभिभावक के बच्चे और गोद लिए गए बच्चे से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। नासिक स्थित भारतीय सुरक्षा प्रेस (आईएसपी) नई पासपोर्ट पुस्तिकाएं तैयार करेगा और जब तक नए दस्तावेज तैयार न हो जाएं, पासपोर्ट के अंतिम पन्ने पर पता प्रकाशित होता रहेगा। मौजूदा पासपोर्ट की मियाद पासपोर्ट पुस्तिका पर अंकित तिथि तक बनी रहेगी।

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