पुस्तक मेला: इस्लाम में महिलाओं के अधिकार बताने वाली किताबों की मांग

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नयी दिल्ली। देश में तीन तलाक और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर चल रही बहस की वजह से लोगों में इस्लाम में महिलाओं के अधिकारों को जानने की ललक बढ़ रही और लोग, विशेष तौर पर महिलाएं, यहां आयोजित विश्व पुस्तक मेले में इससे संबंधित किताबें खरीद रही हैं।
प्रगति मैदान में चल रहे 26 वें विश्व पुस्तक मेले में इस्लामी किताबों का प्रकाशन करने वाले कई प्रकाशक आए हैं। वे उर्दू भाषा के अलावा हिन्दी और अंग्रेजी में भी कई किताबों को लेकर आए हैं। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा इस्लाम में औरतों की स्थिति एवं अधिकारों का वर्णन करने वाली किताबें बिक रही हैं।
मरकज़ी मकतबा इस्लामी पब्लिशर्स के मेराज खालिद ने ‘भाषा’ को बताया कि ‘औरत और इस्लाम’ नाम की किताब सबसे ज्यादा बिक रही है जिसके अंग्रेजी संस्करण का नाम ‘वूमन राइट्स इन इस्लाम’ है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को खरीदने वालों में महिलाएं अधिक हैं और उनमें भी गैर मुस्लिम महिलाओं की संख्या ज्यादा है और वे इस पुस्तक का अंग्रेजी या हिन्दी संस्करण ले रही हैं। वहीं इस्लामी बुक सर्विस लिमेटिड के नसीम अहमद ने बताया कि मेले में ‘पैगंबर की पत्नियां’, ‘पैगंबर की बेटियां’, ‘पति पत्नी के अधिकार’, ‘इस्लाम में पारिवारिक मूल्य’, ‘वूमन इन इस्लाम’ जैसी किताबें अधिक बिक रही हैं। उन्होंने बताया कि इन किताबों में सबसे ज्यादा ‘वूमन इन इस्लाम’ बिक रही है और इसके खरीदारों में अधिकतर गैर मुस्लिम युवा हैं जो बड़ी तादाद में इस किताब को खरीद रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस किताब को मिली प्रतिक्रिया को देखते हुए उन्होंने इसके हिंदी तर्जुमे का काम शुरू कर दिया है और कुछ दिनों में यह किताब हिन्दी में भी उपलब्ध होगी। इस स्टॉल पर किताब खरीद रहे तुषार ने बताया कि टीवी और अखबारों में सब अपनी अपनी बात करते हैं। कोई कहता है कि ‘‘महिलाओं को अधिकार है तो कोई कहता है अधिकार नहीं है। इतना कंफ्यूजन है कि कुछ समझ ही नहीं आता है कि कौन सही है। इसलिए यहां से किताबें खरीद रहे हैं ताकि सही स्थिति मालूम हो।’’ वहीं जावेद ने बताया कि उन्हें उर्दू नहीं आती है और इस्लाम में अधिकतर किताबें उर्दू में होती है। यहां कुछ प्रकाशक ‘‘हिन्दी और अंग्रेजी में पुस्तकें लेकर आए हैं जिन्हें हम खरीद रहे हैं ताकि थोड़ी दीनी जानकारी हो और लोगों के सवालों के जवाब दे सकें।’’ मेराज खालिद ने बताया कि इस्लाम में महिलाओं के मुकाम का वर्णन करने वाली पुस्तकों के अलावा जिहाद और आतंकवाद के बारे में लिखी किताबें भी पाठक ले रहे हैं। इनमें भी गैर मुस्लिमों की संख्या अधिक है।

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