ISIS के मारे गए आतंकी पीछे छोड़ गए हैं अपने अनाथ बच्चे

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बगदाद:मोसुल में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के साथ पिछले 6 महीने से चल रही लड़ाई अब खत्म हो चुकी है। आतंकियों के कब्जे से शहर को आजाद कराया जा चुका है और शहर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है। इसी क्रम में इराक के बचावकर्मियों को मलबे के नीचे से एक बच्चा मिला। यह बच्चा इतना भूखा था कि जमीन पर पड़े कच्चे मांस को खा रहा था। करोल गुजे नाम के फटॉग्रफर ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया। बचाव दल ने मलबे के नीचे से एक छोटी बच्ची को भी बाहर निकाला। बच्ची का नाम अमीना है और वह 3 साल से ज्यादा की नहीं लगती। वह कई दिनों से मलबे के नीचे फंसी हुई थी। बचावकर्मियों को दबी-दबी आवाज में बाहर आ रही उसकी चीखें सुनाई दीं और उन्होंने अमीना को बाहर निकाला। बच्ची ने अपने माता-पिता के बारे में पूछे जाने पर बताया कि वे ‘शहीद’ हो गए हैं।
ब्रिटिश अखबार ‘द टेलिग्राफ’ ने इन बच्चों की दयनीय दशा पर एक रिपोर्ट छापी है। अमीना ISIS के लिए लड़ रहे किसी आतंकी की बेटी है। जाहिर है, उसके माता-पिता इराकी फौज के साथ लड़ते हुए मारे जा चुके हैं। बच्ची बहुत कम अरबी बोल पाती है और बचावकर्मियों का कहना है कि उसके माता-पिता चेचन मूल के रहे होंगे। अमीना अकेली नहीं है। बचावकर्मियों ने ऐसे दर्जनों बच्चों को मलबे के नीचे से निकाला है। कई बच्चे मर चुके हैं, तो कई जिंदा भी हैं। ज्यादातर बच्चे ISIS आतंकवादियों के हैं, जिन्होंने या तो आत्मघाती हमलों में खुद को बम से उड़ा लिया या फिर इराकी सेना के हाथों मारे गए। मां-बाप के मारे जाने के बाद अब ये बच्चे अनाथ हो गए हैं।
इराक के PM हैदर अल-अबादी ने एक हफ्ते पहले ही मोसुल की जंग के खत्म होने का ऐलान कर दिया था। ISIS आतंकवादी खुद तो मारे जा चुके हैं, लेकिन इनमें से कई के बच्चे जिंदा बच गए हैं। ऐसे ही एक और बच्चे को राहतकर्मियों ने बचाया। बच्चे की मां ISIS के लिए लड़ रही थी और एक आत्मघाती हमला करते हुए उसने खुद को बम से उड़ा लिया। यूनिसेफ के मुताबिक, पिछले 3 दिनों के अंदर ऐसे कई दर्जन अनाथ बच्चे चिकित्सा केंद्रों पर लाए गए हैं। कुछ बच्चे तो बहुत छोटे हैं। मलबे के नीचे कुछ नवजात बच्चे भी मिले हैं।
वैसे तो मोसुल की जंग खत्म हो चुकी है, लेकिन शहर के पुराने हिस्से में अभी भी कुछ ऐसे इलाके बाकी हैं जहां आतंकियों और सेना के बीच मुठभेड़ जारी है। इन इलाकों में फंसे बच्चों की हालत बहुत खराब है। इराक में यूनिसेफ की सहायक प्रतिनिधि हामिदा रमाधानी ने बताया, ‘डॉक्टरों ने बताया कि एक हफ्ते छोटे बच्चों को भी इलाज के लिए उनके पास लाया गया है। धूल और मिट्टी में सने छोटे-छोटे बच्चे इलाज के लिए चिकित्सा केंद्रों पर लाए जा रहे हैं।’ हामिदा ने कहा, ‘मोसुल की लड़ाई खत्म होने जा रही है, लेकिन इन बच्चों के शरीर और दिमाग पर लगे जख्म भरने में बहुत समय लगेगा। पिछले 3 सालों में यहां होने वाली नृशंसता, हिंसा और क्रूरता के बीच यहां फंस करीब साढ़े 6 लाख बच्चों के दिमाग पर इन घटनाओं का बहुत गहरा असर रह जाएगा। इन बच्चों ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है।’

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