दारुल उलूम बोला- इस्लाम में नहीं महिलाओं को धर्म प्रचार की इजाजत

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देवबंद। दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती-ए-कराम ने महिलाओं को धर्म प्रचार करने के लिए जायज नहीं बताया है। पैगंबर मोहम्मद साहब के हवाले से दिए दारुल उलूम के फतवे के समर्थन में सहारनपुर के मदरसा मजाहिर उलूम के मुफ्ती-ए-कराम ने भी अपनी मोहर लगाई है।

काफी समय पूर्व दिल्ली के सदर बाजार निवासी हाफिज उबैद उर रहीम ने सवाल किया था कि क्या महिलाएं घर से बाहर जाकर मर्दों की तरह धर्म प्रचार कर सकती हैं और क्या धर्म प्रचार में महिलाएं शामिल हो सकती हैं। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को अकेले हज पर भेजने की कवायद करने के बाद दारुल उलूम के इफ्ता विभाग ने महिलाओं को धर्म प्रचार के लिए भी बिना मेहरम के साथ अकेले सफर करने से इंकार किया है। मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि महिलाओं को अपने घर के मेहरम के साथ ही सफर करने का हुक्म है और औरतों को तब्लीग (धर्म प्रचार) के लिए तब्लीग करना जायज नहीं है।

मुफ्ती-ए-कराम ने पैगंबर मोहम्मद और उनके बाद साहबा-ए-कराम के हवाले से फतवा जारी करते हुए कहा कि पैगंबर मोहम्मद के जमाने में भी औरतों को जब किसी बात की जानकारी करनी होती थी तो वह अपने मर्दों के साथ आती थी या पैगंबर मोहम्मद की पत्नियों और बेटी के पास पहुंचकर शरीयत की जानकारी हासिल करती थी। मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि दीन सिखाने का काम मर्दों का है और वह ही अपनी औरतों को दीन सीखकर उन्हें सिखा सकते हैं। दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-आजम और मदरसा मजाहिर उलूम के मुफ्ती-ए-आजम ने उक्त फतवा पूर्व में भी 70 साल पहले जारी किया था। जिस पर आज के मुफ्ती-ए-कराम भी कायम हैं।