फाइलें और रिकार्ड गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया

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नई दिल्ली: हत्या और कातिलाना हमले जैसे गंभीर 74 मामलों की फाइलें और रिकार्ड गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से प्रत्येक मामले का पूरा ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने लापरवाह रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दोषी अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे वे किसी भी पद पर क्यों न हो हम उन्हें निलंबित कर देंगे। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआइ को भी पक्षकार बना लिया है।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने कहा कि प्रत्येक मामला गंभीर अपराध का है। हत्या डकैती जैसे गंभीर अपराध के आरोपी रिकार्ड के अभाव में कैसे छूट सकते हैं। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल राघवेन्द्र सिंह से कहा कि वे एक एक केस का ब्योरा दें। क्या केस है कौन आरोपी है और किस धारा में मुकदमा चला। फाइल किस किस के पास गई। पीठ ने कहा कि दोषी छोड़े नहीं जाएंगे। कोर्ट अधिकारियों को बुला लेगा। आज की तारीख में वो किसी भी पद पर क्यों न हो कोर्ट उसे निलंबित कर देगा।

इससे पहले राज्य के एडवोकेट जनरल राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि ये मामले 1981 से 1991 के बीच के हैं। कहा कि जिस समय के ये मामले हैं उस समय अपील दाखिल करने की प्रक्रिया भिन्न थी। उन्होंने प्रक्रिया का ब्योरा देते हुए कहा कि कुछ मामलों में हाईकोर्ट ने सीबीआइ जांच के आदेश दिये थे। सिंह ने कहा कि सरकार किसी को बचाना नहीं चाहती। वे सभी मामलों का पूरा ब्योरा संकलित करके कोर्ट को देंगे। कोर्ट ने ब्योरा पेश करने का समय देते हुए मामले की सुनवाई 21 अगस्त तक के लिए टाल दी।

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पिछली सुनवाई गत शुक्रवार को कोर्ट ने सरकार के अगंभीर रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से कहा था कि वो तैयार होकर आये कोर्ट जिम्मेदारी तय करेगा। कोर्ट अधिकारियों को जेल भी भेज सकता है। कोर्ट इस कदर नाराज इसलिए था क्योंकि 10 अप्रैल को कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया था कि वे इन मामलों का रिकार्ड ढूंढवाना या फिर दोबारा फाइलें तैयार कराना सुनिश्चित करें।

इन मामलों में आये कोर्ट के आदेशों को भी पेश करे और ये भी बताए किस आधार पर सरकार ने आदेशों को चुनौती दी थी। साथ ही बताए कि उत्पन्न हुई स्थिति से कैसे निपटा जाएगा। कोर्ट ने यूपी की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट देख कर कहा था कि जैसी स्थिति रिपोर्ट में दिख रही है,न्यायिक प्रशासन में इस लापरवाही की इजाजत नहीं दी जा सकती।

हत्या, कातिलाना हमले जैसे गंभीर 74 आपराधिक मामलों में अभियुक्त निचली अदालत से बरी हो गए थे। जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपीलें दाखिल की थी लेकिन अपील लंबित रहने के दौरान ही मामले के रिकार्ड गायब हो गए। ये मामला सामने तब आया जब हत्या के एक केस में बगैर रिकार्ड के ही यूपी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी।

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