लखनऊ के इस कस्बे में पुलिस के सामने लगती है अवैध शराब की मंडी

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लखनऊ:उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जहरीली शराब पीने से हुई कई मौतों के बाद प्रशासन और यूपी पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ एक ओर अभियान छेड़ रखा है। वहीं दूसरी ओर राजधानी लखनऊ के ही एक इलाके में पूरे सावन महीने एक विशेष मेला लगता है, जहां धड़ल्ले से अवैध और कच्ची शराब बेची जाती है।
रायबरेली रोड स्थित निगोहां कस्बे के इस मेले में कच्ची शराब की लगभग 500 से अधिक दुकानें होती हैं। इस मंडी में कोई 25 रुपये पव्वा, तो कोई 80 रुपये पव्वा चिल्लाकर बिक्री करते हुए दिखाई देता है।
मेले में लगती हैं सैकड़ों दुकानें
हैरानी की बात तो यह है कि इस मेले में भारी पुलिस बल भी तैनात रहता है, मगर तैनात पुलिसवाले शराब की दुकानों की तरफ जाना भी मुनासिब नहीं समझते। पुलिस के मुताबिक, इस मंडी को हटाने के लिए एक दो थानों की पुलिस कुछ नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि अगर उनका कोई सिपाही मंडी की तरफ जाता भी है तो उसे पीट दिया जाता है।
गौरतलब है कि बीते साल ही राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में जहरीली शराब पीने से दर्जन भर मौतों के बाद पुलिस ने शराब का गढ़ कहे जाने वाले असरेन्दा गांव में छापेमारी की थी, जिसमें गांव के लगभग हर घर में धधकती हुई भट्ठियां पाई गई थीं। पुलिस ने हजारों लीटर अवैध शराब और कई क्विंटल लहन बरामद किया था। कुछ महीनों तक अवैध शराब की बिक्री बन्द रही, लेकिन कुछ महीनों के बाद ही फिर से सब शुरू हो गया।
महिलाएं और बच्चे तक बेचते हैं शराब
निगोहां का यह मेला प्राचीन भंवरेश्वर महादेव मंदिर के पास लगता है, जो लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जिले की सीमा पर साईं नदी तट पर है। तीन जिलों की सीमा होने के चलते यहां शराब बेचने वाले आजाद रहते हैं। पुलिस सीमा में ही उलझी रहती है। नदी के उस पार उन्नाव जिला लगता है, मंदिर और प्रांगण में रायबरेली जिला लगता है और मंदिर जाने वाली सड़क के दूसरी तरफ लखनऊ जिला लग जाता है। इन्हें यह फायदा मिलता है कि अगर रायबरेली की पुलिस जाती है, तो शराब विक्रेता उन्नाव भाग जाते हैं, उन्नाव की पुलिस आती है, तो ये रायबरेली या लखनऊ की सीमा पर आ जाते हैं।
बच्चे और महिलाएं हैं इस धंधे में शामिल
सावन महीने के हर रोज मंदिर में लगने वाले इस मेले में 8 साल के बच्चों से लेकर सैकड़ों महिलाओं तक शराब की दुकानें लगाती हैं। कुछ दुकानदारों से बातचीत में पता चला कि शराब बनाना और बेचना उनका पुश्तैनी धंधा है और बच्चों को भी इस धंधे में उतार दिया जाता है।
‘पुश्तैनी धंधा है, अब क्या करें!’
मेले में ड्यटी में लगे एसओ बछरावां सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि शराब विक्रेता इसे अपना पुश्तैनी धंधा बताते हैं, इनको हटाने के लिए प्रयास किया गया है। लेकिन इनके खिलाफ भारी पुलिस बल के साथ कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।

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