पिछले साल घर से भागकर मुंबई पहुंचे सात सौ से ज्यादा बच्चे

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मुंबई:पिछले साल घर से भाग कर 700 से अधिक बच्चे मुम्बई पहुंचे। इनका सपना बॉलीवुड में जगह बनाना या अपने पसंदीदा फिल्म स्टार से मिलना था। इसमें वह बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें मां-बाप ने डांटा था या जो महानगर की चकाचौंध को देखने के ख्वाहिशमंद थे। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2017 में मुम्बई और उसके उपनगरीय क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों से 706 बच्चे पकड़े गए, जिनमें ज्यादातर दूसरे राज्यों के थे। एक अधिकारी ने कहा, पश्चिम उपगरीय क्षेत्र से कुल 528 बच्चों (360 लड़के और 168 लड़कियों) को बचाया गया। मध्य उपनगरीय क्षेत्र में 178 बच्चे (115 लड़के और 63 लड़कियां) पकड़े गए। इनमें ज्यादातर बच्चे 13-18 साल उम्र वर्ग के थे तथा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से आए थे। मुम्बई और उपनगरीय क्षेत्रों के स्टेशनों में मुम्बई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सर्वाधिक 129 बच्चे मिले। पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ संभागीय सुरक्षा आयुक्त अनुप कुमार शुक्ला ने कहा, मुम्बई सेंट्रल स्टेशन पर राजस्थान, गुजरात, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लंबी दूरी की करीब 21-22 गाड़ियां आती हैं। पिछले साल हमने यहां 129 बच्चों को बचाया। शहर की ग्लैमरस जीवन शैली से आकर्षित होकर ये बच्चे अभिनेता या गायक बनने के लिए यहां ऑडिशन देने का मौका तलाशने आते हैं। उनमें से कुछ तो बस अपने पसंदीदा फिल्मस्टार से मिलने या क्रिकेट खिलाड़ी बनने के लिए आते हैं। आरपीएफ के अनुसार कुछ बच्चे महज मुम्बई दर्शन के लिए घर से भागते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं, जो मां-बाप की डांट-फटकार या पिटाई की वजह से भागकर यहां आ जाते हैं।