शासनश्री साध्वी नगीनाश्री का देवलोकगमन, तेरापंथ समाज को अपूर्णीय क्षति

0
394

मुंबईः तेरापंथ धर्म संघ विद्वान साध्वी शासनश्री नगीनाश्री जी का रविवार, 16 जुलाई को भायंदर स्थित तेरापंथ भवन में देवलोकगमन हो गया। उन्होंने कुछ ही समय के संथारा उपरांत 8 बजकर 28 मिनट पर अंतिम सांस ली। उनके देवलोकगमन पर संपूर्ण तेरापंथ समाज हतप्रभ है। उल्लेखनीय है कि 5 जुलाई को साध्वी श्री ने विहार कर भायंदर तेरापंथ भवन में चातुर्मास प्रवेश किया था। उनके देवलोकगमन की खबर सुनने के बाद मुंबई तेरापंथ समाज के श्रावक-श्राविका एवं विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारी साध्वी श्री के अंतिम दर्शन हेतु भायंदर तेरापंथ भवन पहुंचने लगे तथा यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। उनकी वैकुंठ यात्रा सोमवार को सुबह 10.35 पर भायंदर तेरापंथ भवन से निकलेगी।
जानकारी के अनुसार साध्वी श्री इन दिनों अस्वस्थ थीं, लेकिन अंतिम समय तक वे श्रावक-श्राविकाओं को धर्म प्रभावना कर रही थीं। उनके देवलोकगमन पर समाज के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की है।
खबर मिलने के कुछ ही देर बाद भायंदर तेरापंथ भवन पहुंचे अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भलावत ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुरभि सलोनी से कहा कि साध्वी श्री तेरापंथ धर्मसंघ की प्रबुद्ध एवं विद्वान साध्वी थीं। उन्हें करीब 17 भाषाओं का ज्ञान था। वे कुशल साहित्यकार, कुशल वक्ता व लेखक होने के साथ ही धर्मसंघ के प्रति पूर्ण समर्पित थीं। यह तेरापंथ धर्मसंघ की बहुत बड़ी क्षति है। युवाओं को हमेशा उनका वात्सल्य व मार्गदर्शन मिला। समाज के युवाओं के लिए भी यह बहुत बड़ी क्षति है।
खबर पाकर भायंदर तेरापंथ भवन पहुंचीं तेरापंथ महिला मंडल, मुंबई की मंत्री तरुणा बोहरा ने भी सुरभि सलोनी से बातचीत में कहा कि शासन श्री साध्वी नगीना श्री जी ऐसी इंप्रेशन थीं, जो अपने अंतिम समय तक सक्रिय रहीं। वे समता की प्रतिमूर्ति थीं। तबीयत ठीक न होने के बाद भी गुरुदेव की आज्ञा पर उन्होंने विहार किया लेकिन उनके चेहरे पर सिकन तक न थी। अंत तक उनके चेहरे पर मुस्कान थी। उन्होंने अपने नाम को चरितार्थ किया। वे ऐसी व्यक्तित्व थीं की जिंदगीभर उनसे सीखा जा सकता है।
इस मौके पर मीरा रोड भायंदर के तेरापंथी समाज के तमाम श्रावक-श्राविकाओं सहित तमाम पदाधिकारी भवन में पहुंच चुके थे। जिनमें तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मंडल भायंदर सहित संपूर्ण संघ व श्रीमती कांता डूंगरवाल, सुशीला मेहता, मंजू नाहर, सुशीला मादरेचा (कांदिवली), भायंदर की संयोजिका सुमन नाहटा सहित महिला मंडल की तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ता वहां मौजूद थीं।
हाल ही में आचार्य श्री महाश्रमण एवं साध्वी प्रमुखा कनक प्रभा जी ने शासनश्री साध्वी नगीना श्री द्वारा लिखित  नवप्रकाशित पुस्तक अध्यात्म एवं विज्ञान का समीक्षात्मक अनुशीलन का प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान विमोचन किया था। साध्वी श्री अपने अंतिम समय तक सक्रिय रहीं जिसका लाभ आध्यात्मिक व साहित्यिक रूप से संपूर्ण तेरापंथ समाज को प्राप्त हो रहा था।
साध्वी श्री का जन्म 5 मई 1932 को राजस्थान के टाडगढ़ में हुआ था तथा आचार्य श्री तुलसी के सान्निध्य में 1948 में आपने दीक्षा प्राप्त कर धर्मसंघ की सेवा के लिए संयम पथ पर अग्रसर हो गई थीं। आपने बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पांडुचेरी, दिल्ली आदि राज्यों की यात्राएं करके वहां के लोगों को धर्मलाभ से लाभान्वित कर चुकी थीं। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं, जो उनकी अनुपस्थिति में संपूर्ण समाज को लाभान्वित करता रहेगा।

यह भी देखें :   वाशी तेयुप के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पवनजी परमार बने

------------------------------------------------------------------------------------------------------

हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें सुरभि न्यूज़ एप्प

loading...