एमसीडी स्कूलों में बच्चों के चेहरे से लगेगी अटेंडेंस

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नई दिल्लीः एमसीडी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अटेंडेंस के लिए ईस्ट एमसीडी एक नए सिस्टम को लागू करने पर काम कर रही है। इसके तहत एजुकेशन डिपार्टमेंट के कुछ अफसर जल्द ही तेलंगाना राज्य के उन स्कूलों का दौरा करने वाले हैं, जहां बच्चों की अटेंडेंस मैनुअली रजिस्टर में नहीं बल्कि उनके चेहरे से लगाई जाती है। इसमें स्टूडेंट का चेहरा छोटे से कैमरे वाली एक मशीन के आगे लाया जाता है और बस इसी के साथ ही उनकी अटेंडेंस मान ली जाती है। इसमें ना तो बच्चे से मशीन में अंगूठा या अंगुली लगवाने की जरूरत पड़ेगी और ना ही हर रोज क्लास टीचर जोर-जोर से चिल्लाकर बच्चों की अटेंडेंस लेगा।
ईस्ट एमसीडी एजुकेशन डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि यह नया सिस्टम तेलंगाना में काम कर रहा है, जहां सरकार की ओर से कुछ प्राइमरी स्कूलों में अटेंडेंस लगाने वाले इस सिस्टम को लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अगर उन्हें अटेंडेंस लगाने का यह सिस्टम अपने दिल्ली के निगम स्कूलों के लिए ठीक लगा तो फिर इस सिस्टम को यहां भी अपनाया जाएगा।
इस नए सिस्टम में एक छोटी सी मशीन होगी, जिसे क्लास के एंट्री पाइंट या क्लास के अंदर एक जगह लगा दिया जाएगा। इसके बाद हर बच्चे को उस मशीन के सामने आने के लिए बोला जाएगा। मशीन उस बच्चे के चेहरे को रीड करेगी और उसकी फोटो समेत अटेंडेंस हो जाएगी। ऐसे में उन बच्चों का पता लगाना भी बेहद आसान हो जाएगा, जो लंबे समय से ऐब्सेंट चल रहे होंगे।
इस व्यवस्था में पूरे स्कूल को एक सर्वर से जोड़ दिया जाएगा। प्रिंसिपल चाहे तो हर रोज यह पता लगा सकते हैं कि उनके स्कूल में आज कितने बच्चे ऐब्सेंट रहे। बच्चों के नाम की लिस्ट भी आसानी से उन्हें मिल जाएगी। इसमें एक मास्टर कंट्रोलरूम बनाकर भी सारे स्कूलों को आपस में कनेक्ट किया जा सकता है। ताकि हर रोज बच्चों के ऐब्सेंट रहने का अपडेट मिलता रहे।
बताया जा रहा है कि सिस्टम में एक और फीचर यह भी होगा कि जो बच्चे लंबे समय तक ऐब्सेंट चल रहे होंगे, उनकी वह अलग लिस्ट बना लेगा। इसके बाद निगम के अधिकारी यह नहीं कह सकेंगे कि उन्हें महीनों से स्कूल से गायब बच्चों के बारे में जानकारी ही नहीं मिल पाई थी।
26 हजार बच्चे दो साल से ऐब्सेंट
अभी हाल ही में ईस्ट एमसीडी के स्कूलों में पता लगा था कि 365 स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 26 हजार बच्चे दो साल या इससे अधिक वक्त तक ऐब्सेंट रहे। क्या इन बच्चों का केवल रजिस्टर में एडमिशन दिखा दिया गया? या ये बच्चे कभी स्कूल आए भी थे? इस बारे में कोई भी सटीक जानकारी नहीं दे पा रहा है। हालांकि, इस मामले में हर एंगल से जांच किए जाने की बात कही जा रही है।

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