आईटी सेक्टर में नौकरी जाने के खौफ से बढ़ रहे हैं अवसाद के मामले

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नई दिल्ली। आईटी सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा नहीं है। मुझे अपने परिवार को लेकर चिंता हो रही है।’ यह सूइसाइड नोट पुणे में एक आईटी फर्म में काम करने वाले एक व्यक्ति ने बुधवार को अपनी जान देने से पहले लिखा। उसी तरह 60 साल का एक व्यक्ति अपनी बेटी के बारे में बताता है कि उनकी बेटी अचानक बेहद शांत रहने लगी है। जब इस बारे में जानकारी निकाली तो पता चला कि उनकी बेटी की नौकरी चली गई है। उसके बावजूद वह रोजाना ‘ऑफिस जाने के लिए’ घर से निकलती है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अब इस समस्या से निपटने के लिए काउंसलर की मदद ले रही है।
आईटी कंपनियों में छंटनी की तलवार इस फील्ड के लोगों के लिए बहुत बड़ा सिर दर्द बन गई है। इसकी वजह से बहुत बड़ी संख्या में सभी उम्र को लोग तनाव में चले गए हैं। कर्मचारियों को इस टेंशन से निजात पाने के लिए काउन्सलर की मदद लेनी पड़ रही है।
‘योर दोस्त’ नाम के ऑनलाइन काउंसलिंग प्लैटफॉर्म ने ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए ‘फायर्ड टु फायर्ड अप’ सेशन की शुरुआत की। बताया जा रहा है कि पिछले 29 जून से एक जुलाई तक काउंसलिंग के लिए टॉल फ्री नंबर पर 260 फोन और 800 चैट रिक्वेस्ट आए। ‘योर दोस्त’ पर आए फोनों में 43 प्रतिशत ऐसे लोग थे, जो आईटी फर्म में काम करते थे और नौकरी जाने की वजह से अवसाद में थे। इन कॉल्स में सबसे ज्यादा कॉल कर्नाटक (15 फीसदी) से थीं। इसके बाद महाराष्ट्र (12 फीसदी), दिल्ली (11 फीसदी) से थीं। यहां तक कि नॉर्थ ईस्ट, उड़ीसा और हिमाचल प्रदेश जैसे इलाकों से भी कई कॉल आईं। ‘योर दोस्त’ की सीईओ रिचा सिंह ने बताया कि नौकरी जाने का डर बेहद खतरनाक है। यहां तक कि जो लोग इससे बच गए, वे इसलिए परेशान हैं कि कहीं अगला नंबर उनका तो नहीं।
स्वाती प्रेमकुमार (बदला हुआ नाम) पिछले एक दशक से एक आईटी फर्म में काम कर रही हैं। वह अपने करियर को लेकर काफी निश्चिंत थीं, लेकिन भरोसा उस समय डगमगा गया, जब उन्होंने अपने आसपास बैठने वाले लोगों की नौकरी जाते देखी। उन्होंने कहा यह बात तकलीफ देती है, जब आप अपने आसपास के लोगों की नौकरी जाते देखते हैं। अगर मेरी भी नौकरी जाती है तो कुछ दिन तक आर्थिक परेशानी नहीं होगी, लेकिन असली दिक्कत तब होगी, जब आपको माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों को इस बारे में बताना पड़ेगा। छह महीने तक इस समस्या से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए जब वह थक गईं तो उन्होंने प्रफेशनल काउंसलर की मदद ली।
रवि कुमार (बदला हुआ नाम) अपनी पूरी टीम को नौकरी से निकाले जाने तक एक बड़ी आईटी कंपनी में काम कर रहे थे। अपनी गर्भवती पत्नी और चार लोगों के परिवार की चिंता उन्हें खाए जा रही थी। इसके बाद रवि ने नई नौकरी की खोज करने के साथ-साथ ऑनलाइल काउंसलिंग प्लैटफॉर्म से मदद लेनी शुरू कर दी। कई कंपनियां इस समस्या को बखूबी समझती हैं। आईटी कंपनी इन्फोसिस के एचआर हेड और एग्जिक्युटिव वाइस प्रेसीडेंट रिचर्ड लोबो भी स्वीकारते हैं कि यह समस्या वास्तव में बहुत बड़ी बन चुकी है। उन्होंने कहा आईटी सेक्टर हाल के दिनों में कई संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में लोगों की नौकरी सुरक्षित नहीं रह गई है। नौकरी जाने के बाद जब कर्मचारी मदद के लिए हमारे पास आते हैं, तो हम उन्हें शुरुआती तौर पर मदद के लिए काउंलिंग सेशन में हिस्सा लेने का सुझाव देते हैं।

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