पिछले तीन वर्ष में किसानों की आय घटी, एनएसएसओ के आंकड़ों में खुलासा

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नई दिल्ली (ईएमएस)। मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का वादा कर रही है, लेकिन सच यह है पिछले तीन साल में उनकी आमदनी में गिरावट ही आई है। यह जानकारी राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएसओ) के आंकड़ों से सामने आई है। इनमें बताया गया है कि मोदी सरकार के तीन साल में किसानों की आमदनी और जीवन स्तर में नकारात्मक बदलाव आया है। आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष-2014 से 2017 के बीच गेहूं, चावल और दलहन जैसी प्रमुख फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) महज 16 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि खेती की लागत में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं, सब्जियों के थोक मूल्य 70 प्रतिशत तक घट गए हैं। इससे साफ है कि किसानों की आय घट गई है। एनएसएसओ के आंकड़ों के अनुसार देश के 52 प्रतिशत किसानों पर कर्ज है। ऐसे में अगर उनकी आमदनी नहीं बढ़ी तो आने वाले दिन उनके लिए और परेशानी वाले हो सकते हैं। पिछले दो साल से देश में सूखा था। जबकि इस साल फसल बेहतर हुई, तो उसकी कीमतें तेजी से गिरीं। किसान दबाव में हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सिर्फ गेहूं और चावल के एमएसपी बढ़ाकर नहीं हो सकता। इसके लिए मंडी स्तर पर बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत है, जिससे किसान सीधे खरीदार को अपनी फसल दे सकें। इसमें राज्य हस्तक्षेप न करें। एनएसएसओ का कहना है कि देश में किसानों की सुनिश्चित आय का प्रमुख जरिया एमएसपी है। उम्मीद यह की जाती है कि बाजार में भी फसलें एमएसपी से कम में नहीं बिकेंगीं। गेहूं और धान ऐसी फसलें हैं, जिन पर किसान काफी हद तक निर्भर हैं। इसके बावजूद पिछले तीन साल में सरकार ने इनके एमएसपी में 12 प्रतिशत तक का ही इजाफा किया है। उसने किसानों की लागत को एमएसपी से जोड़ने का सुझाव दिया है।