स्कूलों में फ्री सैनिटरी पैड: HC ने मांगा जवाब

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नई दिल्ली:दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें कहा गया है कि सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि स्कूली बच्चियों को मासिक धर्म आदि के बारे में एजुकेट किया जाए, साथ ही राइट टू एजुकेशन ऐक्ट के तहत उन्हें फ्री सैनिटरी पैड मुहैया कराई जाए ताकि बच्चियां प्यूबर्टी की उम्र में स्कूल न छोड़ें।
दिल्ली हाई कोर्ट की ऐक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार से 7 नवंबर तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। बेंच ने सरकार के मौजूदा स्कीम के बारे में डीटेल पेश करने को कहा है। अगर कोई स्कीम है तो उस बारे में बताएं साथ ही क्या स्कीम लागू है ये बताया जाए। साथ ही बताया जाए कि मासिक धर्म के बारे में मौजूदा सिलेबस क्या है। बच्चियों के अलग टॉइलट का क्या स्टेटस है और साथ ही फ्री सैनिटरी पैड के बारे में क्या मेकनिजम है।
पीआईएल में कहा गया है कि बड़ी संख्या में बच्चियां स्कूल छोड़ देती हैं ऐसे में इन बच्चियों को मासिक धर्म और स्वास्थ्य विज्ञान के बारे में बताया जाए। राइट टू एजुकेशन ऐक्ट के तहत फ्री में सैनिटरी पैड मुहैया कराई जाए।
याचिकाकर्ता की वकील ने दलील दी कि सरकार बच्चियों को एजुकेशन देने की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही है क्योंकि बच्चियां एक तय उम्र में शारीरिक बदलाव के कारण स्कूल छोड़ रही हैं। एजुकेशन के अभाव में ये सब हो रहा है। ऐसे में 10 से लेकर 14 साल की उम्र की बच्चियों को इस बारे में बताया जाए कि ऐसा बायलॉजिकल चेंज से होता है और बच्चियों को उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए हर सहायता उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसी बच्चियां जो स्कूल छोड़ रही हैं वह गरीब बैकग्राउंड से आती हैं। उन्हें इस बारे में पैरंट्स से शिक्षा नहीं मिल पाती और न ही संसाधन होता है, इस कारण स्कूल से ड्रॉप आउट हो जाती हैं। सर्वे की रिपोर्ट कहती कि इस उम्र में सबसे ज्यादा बच्चियां स्कूल छोड़ती हैं।
पीआईएल में नैशनल लेवल की पॉलिसी बनाने की गुहार लगाई गई है ताकि एक मेकेनिजम बनाया जा सके जो बच्चियों को स्कूल में इस बारे में एजुकेशन दे और मासिक धर्म से संबंधित प्रॉडक्ट की उपलब्धता स्कूल में सुनिश्चित हो।

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