स्पीड ब्रेकर के कारण हर दिन होती हैं 30 दुर्घटनाएं और 9 मौतें

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नई दिल्ली।भारत में स्पीड ब्रेकर जितनी जानें बचाते नहीं है संभवत: उससे कहीं अधिक जानें ले लेते हैं। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री के आंकड़ों से पता चला है कि स्पीड के कारण दुर्घटनाओं से बचाने के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकरों के कारण रोज 30 दुर्घटनाएं होती हैं और करीब नौ लोग रोज मौत हो जाती है। यह दो सालों का औसत है। केंद्र सरकार ने 2014 से स्पीड ब्रेकर के कारण होने वाले हादसों का डेटा इकट्ठा करना शुरू किया था। बीते साल का डेटा अभी सरकार को जारी करना है लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि आकंड़ा लगभग बराबर ही होगा।
स्पीड ब्रेकर के कारण अकेले भारत में जितनी जानें जाती है उससे कम लोग ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में 2015 में सड़क दुर्घटनाओं में 2,937 और ब्रिटेन में 3,409 लोगों की मौत हुई थी।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने माना, ‘यह समस्या पूरे देश में है। हमारे यहां हर रोड पर स्पीड ब्रेकर हैं जो कि आपकी हड्डियां तोड़ सकते हैं और आपके वाहन को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं।’ उन्होंने बातचीत में बताया कि वह राज्य सरकारों के लिखेंगे कि वे सुनिश्चित करें कि स्पीड ब्रेकर बनाते समय नियमों का पालन हो।
गडकरी ने कहा कि मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि स्पीड ब्रेकर एक निश्चित स्थान पर सोच-विचार कर बनाया जाए। ग्रामीण इलाकों में हर 100 मीटर पर एक स्पीड ब्रेकर बना मिलता है। ऐसा ज्यादातर रिहायशी इलाकों में होता है। कई जगहों पर लोग ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ईंटों की मदद से डीआईवाई बंप्स (हाथ से बने स्पीड ब्रेकर) बना देते हैं।
सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने हालांकि हाइवे बनाने वाली सभी एजेंसियों को आदेश दिए हैं कि मुख्य रास्तों से सभी स्पीड ब्रेकर हटा दिए जाएं। राज्यों को लेकर मंत्रालय के कहना है कि वह केवल उन्हें नियमों का पालन करने के लिए कह सकता है।

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