GST के कोहरे में उड़ान नहीं भर पा रहे इंपोर्टेड एयरक्राफ्ट

0
50

नई दिल्लीःएजेंसी। इंडिगो, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया ने इस महीने के पहले हफ्ते में जो एयरक्राफ्ट आयात किए थे, वे उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा नए गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स के नियमों के तहत टैक्स लगाने के बारे में कन्फ्यूजन के कारण हो रहा है। इससे इन कंपनियों को कमाई से हाथ धोना पड़ रहा है। कस्टम्स ऐंड एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरक्राफ्ट्स की टोटल कॉस्ट पर 5 पर्सेंट टैक्स मांगा है, वहीं लीज रेंटल्स पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगेगा। एयरलाइंस का कहना है कि यह तो अनुचित है।

सरकार ने भी साफ किया है कि लीज पर हासिल किए गए एयरक्राफ्ट, एयरक्राफ्ट इंजन और पुर्जों पर नए सिस्टम में डबल टैक्सेशन नहीं होगा। हालांकि इन विमानों को 8 जुलाई को सरकारी स्पष्टीकरण आने के पहले आयात किया गया था। तीनों कंपनियों के पाए ऐसा एक-एक विमान है। जीएसटी 1 जुलाई से लागू हुआ था। उसके मूल नियमों में दोनों ही मामलों में टैक्सेशन की इजाजत दी गई थी। 8 जुलाई के सर्कुलर में यह नहीं कहा गया है कि ताजा नियम पिछली तारीख से लागू होगा या नहीं।

एक एयरलाइंस के एक सीनियर एग्जिक्युटिव ने कहा कि दिक्कत यही बात साफ न होने के कारण पैदा हुई है। उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार का आदेश जीएसटी लागू होने के दिन से ही प्रभावी होता तो हमें यह परेशानी नहीं होती।’

हालांकि जीएसटी से जुड़े एक सीनियर टैक्स ऑफिशल ने कहा कि ऐसे सर्कुलर की बातें आमतौर पर पिछली तारीख से लागू होती रही हैं। उन्होंने ईटी से कहा, ‘दूसरे शब्दों में मेरी निजी राय है कि यह नहीं कहा जा सकता है कि सर्कुलर केवल आगे के दिनों के लिए हैं, खासतौर से तब, जब उसमें महज 7 दिन पुराने किसी कानून या प्रावधान को स्पष्ट किया गया हो।’ ईटी को इस मामले में आधिकारिक कॉमेंट नहीं मिल सका। इंडिगो, एयरएशिया इंडिया और विस्तारा के टॉप एग्जिक्युटिव्स को भेजे गए संदेशों का जवाब नहीं आया। हालांकि पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बात करने वाले एग्जिक्युटिव्स ने कहा कि उन्हें अभी सरकारी अधिकारियों से कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है।

यह भी देखें :   दक्षिण गुजरात में 180 किस्मों के आमों की पैदावार

एक सीनियर एग्जिक्युटिव ने कहा, ‘हमारे विमान का इंपोर्ट 8 जुलाई 2017 से पहले हुआ था। कस्टम्स डिपार्टमेंट का मानना है कि इस एयरक्राफ्ट के आयात पर 5 पर्सेंट टैक्स लगना चाहिए। हमारी राय में ऐसा करना अनुचित है।

एक ऐनालिस्ट ने कहा कि ऐसे मामलों से उस मकसद पर आंच आएगी, जिसके लिए जीएसटी लागू किया गया है। एविएशन अडवाइजरी फर्म मार्टिन कंसल्टिंग के चीफ एग्जिक्युटिव मार्क मार्टिन ने कहा, ‘एयरक्राफ्ट जैसी किसी भी लीज्ड एसेट की एक लागत भी तो है, भले ही उसका उपयोग किया जा रहा हो या नहीं। ऐसी देरी से न केवल एयरलाइंस की आमदनी को चपत लगेगी, बल्कि उस मकसद पर भी आंच आएगी, जिसके लिए जीएसटी को लागू किया गया।’

Source: shilpkar

------------------------------------------------------------------------------------------------------

हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें सुरभि न्यूज़ एप्प

loading...