26-28% के सालाना टारगेट के करीब ले जाना है ऑपरेटिंग मार्जिन: TCS

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मुंबईःएजेंसी। देश की सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पहले क्वॉर्टर के दौरान भले ही सैलरी में बढ़ोतरी और रुपये में मजबूती की चोट लगी हो, लेकिन वह इसे 26-28 पर्सेंट के सालाना टारगेट के करीब लाने के लिए काम कर रही है। यह बात कंपनी के टॉप एग्जिक्यूटिव ने ईटी से कही। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन 23.4 पर्सेंट रहा, जबकि सालभर पहले की इसी तिमाही में आंकड़ा 25.7 पर्सेंट था।

फरवरी में एन चंद्रशेखरन के बाद कंपनी के सीईओ बने राजेश गोपीनाथन ने कहा, ‘टारगेट 26-28 पर्सेंट का है। ऑपरेटिंग मार्जिन घटा है। हम इसे फिर बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। हम नए क्षेत्रों में कदम रख रहे हैं और डिजिटल सेगमेंट से ग्रोथ और बढ़ने की उम्मीद है।’ उन्होंने कहा कि टोटल रेवेन्यू में डिजिटल का हिस्सा 18.9 पर्सेंट है और यह और बढ़ेगा।

गोपीनाथन ने कहा, ‘मैच्योर होने के साथ टेक्नॉलजी को बड़े पैमाने पर अपनाया जाने लगता है। संख्या में कम, लेकिन कुछ बड़ी डील्स होंगी। आज हम जिसे लेगेसी बिजनस कह रहे हैं, उसे ही दस साल पहले ई-बिजनस कहा करते थे। डिजिटल में ग्रोथ की संभावना 90-95 पर्सेंट है। वेब टेक्नॉलजीज को 10-12 साल लगे। डिजिटल को 7-8 साल लगेंगे।’

150 अरब डॉलर की आईटी इंडस्ट्री की अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तरह टीसीएस को भी बड़ी डील्स के मामले में सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है और छोटी डिजिटल डील्स पर इसकी निर्भरता बढ़ रही है। रोबॉटिक्स, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इसके बिजनस मॉडल का हिस्सा बन रहे हैं। गोपीनाथन ने कहा कि डील्स का आकार बढ़ रहा है और कंपनी का पार्टिसिपेशन भी बेहतर हो रहा है। कंपनी के लिए अभी सबसे बड़ा रोड़ा यह है कि क्लाइंट्स इसके सबसे बड़े मार्केट अमेरिका में टेक्नॉलजी पर ज्यादा खर्च को टाल रहे हैं।

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सीएलएसए के ऐनालिस्ट अंकुर रुद्र के अनुसार, कम रियलाइजेशन के कारण मार्जिन पर बेहतर ढंग से कंट्रोल नहीं हो सका, लेकिन दूसरी छमाही में दमदार ग्रोथ और यूटिलाइजेशन बढ़ने से मार्जिन में रिकवरी हो सकती है। वहीं एचएसबीसी ने कहा कि बैंकिंग और रिटेल सेक्टर में कमजोरी के कारण टीसीएस के मार्जिन पर दबाव बना है।

हालांकि गोपीनाथ ने उम्मीद जताई कि इकनॉमिक साइकल बदलने पर कंपनी की ग्रोथ तेज होगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि सेंटिमेंट नेगेटिव है। बैंकिंग, फाइनैंशल सर्विसेज ऐंड इंश्योरेंस जैसे हमारे कुछ बड़े सेक्टर्स में निवेश कुछ कम हो रहा है क्योंकि क्लाइंट्स अमेरिका में रेग्युलेटरी मोर्चे पर बदलाव हो सकने की स्थिति को देखकर रुके हुए हैं। मुझे तो टेक्नॉलजी के लिए काफी डिमांड दिख रही है।’

कंपनी अपना टैलेंट पूल बढ़ाने के कदम भी उठा रही है। पिछले महीने टीसीएस ने बताया था कि उसने पिछले पांच वर्षों में देशभर में 12500 से ज्यादा लोगों को हायर किया और उसे 2017 में और हायरिंग की उम्मीद है। हालांकि अमेरिका में हायरिंग की उसकी कोशिशें ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। गोपीनाथन ने कहा, ‘भारत में हम हजारों लोगों को हायर करते हैं, लेकिन अमेरिका में 1000 लोगों की हायरिंग भी चुनौतीपूर्ण है। अमेरिका में पूरी इकॉनमी के लेवल पर फुल एंप्लॉयमेंट है और टेक सेक्टर में तो सप्लाई और भी सीमित है। हायरिंग को इस पिक्चर के हिसाब से देखा जाना चाहिए।’

टीसीएस की प्रतिद्वंद्वी कंपनी इन्फोसिस ने अमेरिका में अगले दो वर्षों में 10000 से ज्यादा लोगों को हायर करने की योजना बनाई है, जिसमें कुछ फ्रेशर्स होंगे और कुछ अनुभवी लोग। कॉग्निजेंट ने 2016 में अमेरिका में 4000 लोगों को हायर किया था। उसने भी हायरिंग की रफ्तार बढ़ाने की उम्मीद जताई थी।

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Source: shilpkar

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